📍 (श्रेय अवस्थी /शाहपुर) 7 सितम्बर 2025
जब एक राज्य प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा हो, तब असली नेतृत्व वही होता है जो संकट में राहत नहीं, संकल्प लेकर खड़ा हो। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में आई हालिया आपदा के समय भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने यही कर दिखाया।
भाजपा हमेशा "सेवा ही संगठन" के सिद्धांत पर चली है, लेकिन यह सिद्धांत ज़मीन पर तब और अधिक प्रभावी बनता है जब उसका नेतृत्व कर्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील और सजग हो। डॉ. राजीव बिंदल ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा सत्ता में हो या विपक्ष में, जनता की सेवा में कोई कमी नहीं आती।
हरियाणा से विशेष राहत सामग्री रवाना
7 सितम्बर 2025, रविवार को हरियाणा की भाजपा सरकार ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के लिए विशेष राहत सामग्री पंचकूला से रवाना की।
इस खेप को हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी और हिमाचल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने स्वयं हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह न केवल आपदा राहत का कार्य था, बल्कि दो राज्यों के
बीच जनसेवा की भावना और समन्वय का प्रतीक भी बना।
राहत सामग्री में क्या-क्या शामिल है?
राहत सामग्रीमात्रातरपाल500गद्दे500कम्बल500चावल100 क्विंटलआटा50 क्विंटलदाल10 क्विंटलतेल की बोतलें1000अन्यमसाले, हल्दी, नमक आदि
यह सामग्री न केवल बुनियादी ज़रूरतें पूरी करती है, बल्कि एक बड़ा संदेश भी देती है — कि भाजपा परिवार इस आपदा की घड़ी में हर पीड़ित के साथ खड़ा है।
डॉ. बिंदल: जननेता, सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष नहीं |
डॉ. राजीव बिंदल का राजनीतिक जीवन सिर्फ पदों तक सीमित नहीं है। वे जन-भावनाओं, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रीय विचारधारा के प्रतिनिधि हैं।
उनके नेतृत्व में भाजपा ने बार-बार सिद्ध किया है कि संगठनात्मक क्षमता, आपदा प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की ऊर्जा को किस प्रकार एकजुट किया जा सकता है।
जब मंडी, सिरमौर, कुल्लू, किन्नौर या अब चंबा में आपदा आई,
डॉ. बिंदल ने सिर्फ बयान नहीं दिए, संगठन को एकजुट किया, राहत सामग्री जुटाई और ज़मीनी कार्रवाई की निगरानी की।
कांग्रेस अब तक तय नहीं कर पाई अध्यक्ष!
जहां एक ओर भाजपा बिना सत्ता में रहे पूरे प्रदेश में सेवा कार्यों में सक्रिय है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी अभी तक यह तय नहीं कर पाई कि उसका अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा।
यह भाजपा और कांग्रेस के नज़रिया और प्राथमिकताओं का फर्क साफ दिखाता है:
एक तरफ बिंदल जी का नेतृत्व, जो संगठन को आपदा राहत में लगा रहा है,
दूसरी तरफ कांग्रेस, जो अपने ही घर की लड़ाई सुलझाने में उलझी है।
"सत्ता नहीं, सेवा हमारा आधार"
डॉ. बिंदल बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि भाजपा का आधार सत्ता नहीं, बल्कि सेवा और संगठन है।
वर्तमान आपदा में उन्होंने दिखा दिया कि पार्टी का पूरा ढांचा, चाहे पंचायत स्तर पर हो या प्रदेश स्तर पर, एकजुट होकर
जनसेवा कर सकता है।
विपक्ष में रहकर भी अगर कोई पार्टी पूरे प्रदेश में राहत पहुंचा सकती है, तो वह भाजपा है।
संगठित भाजपा, संवेदनशील नेतृत्व
हिमाचल भाजपा के कार्यकर्ता बिना किसी प्रचार के, गांव-गांव जाकर राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। और यह संभव हो पाया है सिर्फ इसलिए क्योंकि:
• संगठन एकजुट है
• नेतृत्व स्पष्ट और दृढ़ है
• जनसेवा प्राथमिकता है, राजनीति नहीं
एक तस्वीर जो सब कह देती है
7 सितंबर को पंचकूला से राहत सामग्री रवाना करते समय डॉ. बिंदल और सीएम सैनी की तस्वीरें सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थीं। वे दर्शाती हैं कि भाजपा का नेटवर्क राज्यों की सीमाओं से परे जाकर, मानवता के साथ जुड़ा है।
बिंदल जी की कार्यशैली:
ज़मीनी,निर्णायक और प्रेरणादायक
डॉ. बिंदल का नेतृत्व सिर्फ बैठकों और भाषणों तक सीमित नहीं है। वे:
• खुद राहत शिविरों का निरीक्षण करते हैं
• स्वयंसेवकों से संवाद करते हैं
• प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संपर्क रखते हैं
उनकी यह हैंड्स-ऑन लीडरशिप स्टाइल भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है और आम जनता के लिए भरोसे का प्रतीक।
जन-संदेश: भाजपा से है उम्मीद
प्रदेश के कोने-कोने में जब भाजपा कार्यकर्ता राहत सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं, तो जनता के मन में एक ही बात घर कर रही है:
"जब सत्ता में नहीं होते हुए इतना कर सकते हैं, तो सत्ता में आने पर कितना कुछ कर सकते हैं।"
यह विश्वास, यह भरोसा ही भाजपा की असली ताकत है — और इसका नेतृत्व कर रहे हैं डॉ. राजीव बिंदल।
नेतृत्व वही जो संकट में साथ निभाए
चंबा की इस आपदा में जो कुछ भी हुआ, वह केवल एक राहत अभियान नहीं था। यह एक राजनीतिक नेतृत्व की परीक्षा थी, और डॉ. राजीव बिंदल उसमें पूर्ण अंक लेकर निकले।
सेवा, समर्पण, संगठन और संवेदना — इन चार स्तंभों पर खड़ा है बिंदल जी का नेतृत्व।
"राजनीति में कई लोग आते हैं, पर जननेता वही होता है जो सत्ता की सीमाओं से परे जाकर जनता का साथ निभाए।"
डॉ. राजीव बिंदल हिमाचल भाजपा के ऐसे ही जननेता हैं — संकट में भी, सेवा में भी।
भाजपा हिमाचल — नेतृत्व में बिंदल, संकल्प में सेवा।