डाक विभाग में नौकरी पाने के लिए शातिरों ने 100 में से 100 नंबर की बना दी फर्जी मार्कशीट

Swatantra Himachal
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सीबीआई ने हिमाचल प्रदेश के डाक विभाग में फर्जी दसवीं मार्कशीट के ज़रिये नौकरी हासिल करने के मामले में राहत नहीं दी है। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्धों ने कुल 700 में से 680 व 690 अंक वाली मार्कशीट तैयार कर क्लर्क, शाखा पोस्ट मास्टर व ग्रामीण डाक सेवकों की भर्ती प्रक्रिया में प्रवेश पाया।


सीबीआई सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने अंग्रेजी, गणित व विज्ञान इन तीन पेपरों में शत-प्रतिशत अंक दिखाने के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए थे। “जब हम


पर संदेह हुआ कि दूसरे राज्यों के ये युवा इतने उच्च अंक लाना असंभव है, तब हमने सम्बंधित बोर्ड से संपर्क कर सत्यापन कराया,” सीबीआई प्रवक्ता ने कहा।

अन्य प्रमुख तथ्यः

  • स्वयंसेवक त्याग: जांच के दबाव में पांच संदिग्धों ने हाल ही में पद छोड़ दिया।

  • एफआईआर दर्ज: शिमला के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो शाखा में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें राजस्थान, हरियाणा, यूपी व बिहार निवासी आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज़ पेश कर सरकारी सेवाएँ प्राप्त करने का आरोप है।

  • पहले के मामले: शिमला जिला में इस तरह के दस से अधिक मामले पहले भी उजागर हो चुके हैं; कुछ प्रकरण सीबीआई को सौंपे गए, जबकि अन्य की जांच स्थानीय पुलिस कर रही है।

  • भर्तियाँ: डाक विभाग शाखा पोस्ट मास्टर, सहायक शाखा पोस्ट मास्टर व ग्रामीण डाक सेवकों के पदों पर अखिल भारतीय ऑनलाइन चयन प्रक्रिया के माध्यम से भर्ती करता है, जिसमें मैट्रिक के अंक मेरिट सूची के लिए निर्णयकारी होते हैं।

सीबीआई को इस पूरे मामले के पीछे एक संगठित गिरोह होने का भी संदेह है, जो कई राज्यों में फर्जी कागजात तैयार कर भर्ती प्रक्रिया में सेंध लगा रहा है। जांच अधिकारी बताते हैं कि अगली पड़ताल में फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुँचकर सहयोगियों व सरगना की खोज जारी रहेगी।

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