किरतपुर–नेरचौक चार-लेन बनने के बाद कटे हुए बिलासपुर शहर की नेशनल हाईवे-205—से कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं घुमारवीं विधायक राजेश धर्माणी ने एक अभिनव पहल की है। उनके निर्देश पर लोक निर्माण विभाग ने गोबिंदसागर झील के नीचे से 4.5 किलोमीटर लंबा अंडरवॉटर टनल निकालने की feasibility रिपोर्ट तैयार कराने के लिए कंसलटन्ट नियुक्त किया था।
प्रस्तावित अंडरवॉटर टनल
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रिपोर्ट के अनुसार, टनल की पूर्व-विस्तृत लंबाई लगभग 4.5 किमी होगी।
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इसका प्रस्तावित मार्ग लोअर लखनपुर से शुरू होकर डमली (ऋषिकेश के पास) में उभरेगा।
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प्रारंभिक अनुमानित निर्माण लागत लगभग ₹1,900 करोड़ आंकी गई है।
कंसलटेंट ने फ़ेज-I की रिपोर्ट में सिल्ट तथा पानी के स्तर और बोझ सहने की क्षमता का विस्तृत परीक्षण किए बगैर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए अब सरकारी स्तर पर इस रिपोर्ट की गहन समीक्षा होनी है। चर्चा में यह भी है कि यदि टनल निर्माण तकनीकी या आर्थिक दृष्टि से कठिन साबित हुआ तो alternative के रूप में झील पार पुल निर्माण की योजनाओं पर काम शुरू किया जाएगा।
ब्रिज विकल्प की चुनौतियाँ
पुल निर्माण पर विचार करते समय मुख्य अड़चन यहाँ की व्यस्त रेलवे लाइन के ऊँचे पिलरों को पार करना है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पुल से रेलवे लाइन के ऊपर से कनेक्ट करना हो तो ब्वायज स्कूल रौड़ा के पास पुल का पिलर रेल नीति के मानकों से ऊँचा होना चाहिए, जिससे लागत और जटिलता दोनों बढ़ जाएँगी।
कारोबार और पर्यटन के लाभ
राजेश धर्माणी का मानना है कि गोबिंदसागर के नीचे सुरंग तैयार कर बिलासपुर को चार-लेन से जोड़ने से न सिर्फ व्यापारिक गतिविधियाँ पुनर्जीवित होंगी, बल्कि झील में बोटिंग, स्कूबा डाइविंग जैसे जल-पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय अर्थव्यवस्था को ठोस बढ़ावा मिलेगा और बिलासपुर के व्यावसायिक समुदाय को नई दिशा मिलेगी।
गवर्नमेंट में इस रिपोर्ट की चर्चा के बाद ही फाइनल सर्वे एवं टनल या पुल निर्माण के लिए व्यापक तकनीकी सर्वे का काम शुरू होगा। फिलहाल कंसलटेंट की रिपोर्ट में सुझाए मार्ग, लागत और तकनीकी चुनौतियों पर अधिकारी विचार-विमर्श कर रहे हैं। निर्णय होने के बाद ही कार्ययोजना का औपचारिक रूप से ऐलान होगा।