सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय देइया, जिला शिमला में तैनात TGT कला रोशन लाल को शुक्रवार को स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा बर्खास्त कर दिया गया। उस पर फर्जी अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र के बूते आरक्षण का दुरुपयोग करने का आरोप था।
घटना का क्रम
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जनवरी 2025 में मामला दर्ज
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नेरवा पुलिस थाना में रोशन लाल के खिलाफ आईपीसी की धाराएँ 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जीवाड़ा), 468 (फर्जी दस्तावेज) और 471 (झूठे दस्तावेजों का उपयोग) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
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शिकायत अनुसूचित जाति बेरोजगार संघ ने शिक्षा सचिव को भेजी थी।
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विभागीय जांच में खुलासा
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जांच में पाया गया कि रोशन लाल ने 2008–09 की एससी (आईआरडीपी) मेरिट सूची में अपनी कक्षा सामान्य श्रेणी की हैसियत से प्रवेश कराया था।
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नियुक्ति के दौरान मेडिकल जांच रिपोर्ट और सेवा पुस्तिका सहित कई आधिकारिक दस्तावेजों में स्वयं को अनुसूचित जाति के रूप में प्रस्तुत किया।
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बाद में इनमें कथित तौर पर व्हिटनर के जरिए छेड़खानी की गई।
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नोटिस और जवाबदेही
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विभाग ने कई नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन रोशन लाल संतोषजनक जवाब देने में असफल रहे।
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नवंबर 2024 में दिए गए अपने बयान में उन्होंने सामान्य श्रेणी से संबंध स्वीकार किया।
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संवेदनशील कागजात तक पहुँच
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स्कूल की ऑर्डर बुक जांच में पता चला कि 2022 में उन्हें लिपिकीय जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं, जिससे विद्यालय रिकॉर्ड तक उनकी पहुँच थी।
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संदेह है कि इसी उपलब्धि का इस्तेमाल दस्तावेजों में फेरबदल के लिए किया गया।
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बर्खास्तगी का आदेश
शनिवार को निदेशक (स्कूल शिक्षा) आशीष कोहली ने आधिकारिक आदेश जारी कर रोशन लाल की सेवाएँ तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। आदेश में उल्लेख है कि “नियुक्ति आदेश की शर्त संख्या 14 के तहत, गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत करके अनुसूचित जाति श्रेणी के कोटे का अवैध लाभ उठाने के आधार पर उनकी सेवाएँ समाप्त की जाती हैं।”
प्रभाव एवं आगे की कार्रवाई:
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मामले की आगे की जांच पुलिस कर रही है, जिसमें आरोपित के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के साथ ही अन्य दोषी अधिकारियों की भूमिका भी परखी जाएगी।
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एससी बेरोजगार संघ ने शिक्षाविभाग से आश्वासन मांगते हुए कहा है कि भविष्य में ऐसे कदाचारियों के चयन पर कड़ी नजर रखी जाए।