किरतपुर–नेरचौक फोरलेन के समापन के बाद से बिलासपुर शहर मुख्य मार्ग से कट गया था और स्थानीय व्यापार व आवागमन पर असर दिखने लगा था। इसी समस्या के समाधान के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री एवं घुमारवीं विधायक *राजेश धर्माणी* ने एक अनूठा प्रस्ताव पेश किया है: गोबिंदसागर झील के नीचे 4.5 किमी लंबी अंडरवॉटर टनल का निर्माण।
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#### योजना का स्वरूप
* *स्थान चयन*:
– लुहणू के बजाय बाबा बजिया धौलरा मंदिर के पास से सुरंग आरंभ।
– ऋषिकेश के समीप डमली में टनल का उद्घाटन स्थल।
* *लंबाई एवं लागत*:
– कुल लगभग 4.50 किलोमीटर लंबी।
– अनुमानित निर्माण लागत: ₹1,900 करोड़।
* *लक्ष्य*:
– बिलासपुर को सीधे फोरलेन से जोड़कर व्यापार एवं यातायात सुगम बनाना।
– झील में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना।
– शहर की आर्थिक गतिशीलता को पुनर्जीवित करना।
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#### फिज़िबिलिटी रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया
* *कंसलटेंट चयन*: लोक निर्माण विभाग ने सर्वे के लिए एक श्रद्धालु कंसलटेंट हायर किया।
* *रिपोर्ट के मुख्य बिंदु*:
– पानी व सिल्ट का स्तर मापने के बाद ही टनल की संरचनात्मक ठोसता का निर्णय।
– सुरक्षित निर्माण के लिए नवीनतम TBM (टनल बोरिंग मशीन) तकनीक का प्रस्ताव।
* *आगामी कदम*:
– रिपोर्ट पर गहन सरकारी चर्चा।
– फाइनल सर्वे व मिट्टी–सिल्ट परीक्षण के बाद ही निर्माण की स्वीकृति।
– यदि टनल निर्माण संभव नहीं हुआ, तो पुल निर्माण विकल्प पर विचार।
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#### चुनौतियाँ और विकल्प
– रेलवे लाइन के ऊँचे पिलर पुल निर्माण को जटिल बनाते हैं।
– पुल निर्माण के लिए ब्वायज स्कूल रौड़ा के स्तर पर ऊँचाई सुनिश्चित करनी पड़ेगी, जिससे लागत और जटिलता बढ़ जाएगी।
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– व्यापारियों का मानना है कि फोरलेन से कनेक्टिविटी बहाल होने पर व्यापारिक गतिशीलता में तेजी आएगी।
– पर्यटन विशेषज्ञों को उम्मीद है कि झील के नीचे से गुजरती टनल एक नया आकर्षण केंद्र बनेगी।
राजेश धर्माणी के नेतृत्व में उठाया गया यह कदम बिलासपुर के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है। अब निश्चित रूप से सरकारी समीक्षा व फाइनल सर्वे परिणाम तय करेंगे कि यह महत्त्वाकांक्षी अंडरवॉटर टनल प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है या फिर पारंपरिक पुल निर्माण के विकल्प को तरजीह दी जाएगी।
