प्राकृतिक जल­स्त्रोतों की धरोहर बचाने में जुटे खैरियां निवासी

Swatantra Himachal
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  राकेश राणा// बंगाणा

बंगाणा के ऊना उपमंडल स्थित डीहर पंचायत के गांव खैरियां में स्थानीय बुजुर्गों द्वारा सदियों पहले बनाए गए तालाब, बावड़ियाँ, खातियां और अन्य प्राकृतिक जल स्त्रोतों की सफाई एवं देखभाल का एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया जा रहा है।  जोगेन्द्र सिंह ने बताया कि इन जल स्त्रोतों की मिठास और प्राकृतिक शुद्धता सरकारी नल वाले पानी में नहीं होती, इसलिए गांववासी गर्मियों के महीनों में पीने का पानी यहीं से लाना पसंद करते हैं।



“हमारा यह कर्तव्य है कि जो धरोहर हमारे पूर्वजों ने जंगलों में जंगली जानवरों के लिए बनाई थी, उसे हम नष्ट न होने दें। तालाबों और बावड़ियों की सफाई से जानवरों को भी पीने का पानी उपलब्ध होता है, और उन्हें भटकना नहीं पड़ता,” जोगेन्द्र सिंह ने कहा।

पिछले सप्ताह से खैरियां निवासी युवा एवं बुजुर्ग मिलकर जंगल में बने तालाब की सफाई में लगे हुए हैं। सेवानिवृत्त सुबेदार हरदीप सिंह, सुखवीर सिंह, रणवीर सिंह, रणदीप सिंह, कुलदीप सिंह, धर्मवीर सिंह के साथ अंजना कुमारी, रीना ठाकुर, सोना देवी, मनू देवी, लता ठाकुर व अनिरुद्ध शर्मा सहित कई अन्य ग्रामीण भी इस मुहिम में सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं।

गांववासी बताते हैं कि सरकार द्वारा हर घर में जल पाइपलाइन पहुंचा दी गई है, लेकिन प्राकृतिक स्रोतों की शुद्ध­ता बरकरार रखने का अपना ही सुखद अनुभव है। इसलिए बहरे माह यानी गर्मियों के दौरान पीने योग्य पानी इन स्रोतों से ही जुटाया जाता है।

मुख्य बिंदु:

  • सेवानिवृत्त सुबेदार जोगेन्द्र सिंह व अन्य बुजुर्गों ने जंगलों में बनाए प्राकृतिक जल स्त्रोतों का निर्माण किया था।

  • युवा पीढ़ी में भी इस मुहिम को आगे बढ़ाने की प्रेरणा जगी है।

  • तालाबों एवं बावड़ियों की सफाई से स्थानीय वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

अभियान के इस पहरू में गाँव के लोगों ने एकजुट होकर प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने का संदेश दिया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा इसी तरह जीवित रहेगी।

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